Sunday, 12 January 2014

न तोड़ ये रंगीन वहम मेरा - -

उन बनफ़शी लम्हों का जादू और 
तेरी निगाहों में अक्स मेरा,
फिर धुंध भरी राहों में 
खो जाने को दिल 
चाहता है,
कोई 
ख़ुश्बू जो भर जाए साँसों में इक -
अहसास ए ताज़गी, ज़िन्दगी 
फिर लगे बामानी ओ 
ख़ूबसूरत, फिर 
तेरी बज़्म 
ए गुल 
में जाने को दिल चाहता है, ख्वाब 
ही सही न तोड़ ये रंगीन वहम 
मेरा, फिर ख़ुद से निकल 
तेरे वजूद में दाख़िल 
होने को दिल 
चाहता 
है - -

* * 
- शांतनु सान्याल
बनफ़शी - बैगनी रंग   

http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
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