Thursday, 5 December 2013

हमेशा के लिए - -

न जगाए नींद से कोई मुझे, कि हैं 
मेरी आँखें ख्वाब दीदन इस 
लम्हा, इस लम्हे से 
ज़िन्दगी को 
मिलती 
है कुछ तो दर्द ए रिहाई, इस पल 
में, मैं जी लेता हूँ कुछ उम्र 
से ज़ियादा, न जगाए 
इस वक़्त कोई 
मुझे, कि 
हूँ मैं अभी किसी की बाँहों में - - 
ख़ुश्बू की मानिंद बिखरा 
बिखरा हुआ, किसी 
की साँसों में 
मिला 
है अभी अभी, मुझे अपना पता !
कि अब मैं गुमशुदा रूह 
नहीं, न पुकारो मुझे 
लौटती हुईं -
आवाज़
ए माज़ी, है गुम मेरा वजूद इस 
पल किसी में हमेशा के 
लिए - - 

* * 
- शांतनु सान्याल 

http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
poetry on canvas