Friday, 27 December 2013

दाँव पे लगा दिया - -

तुम्हारी चाहतों में है कितनी सदाक़त 
ये सिर्फ़ तुम्हें है ख़बर, हमने तो 
ज़िन्दगी यूँ ही दाँव पे 
लगा दिया, हर 
मोड़ पर 
हिसाब ए मंज़िल आसां नहीं, तुम्हें - - 
इसलिए दिल में मुस्तक़ल तौर 
पे बसा लिया, वो हँसते हैं 
मेरी दीवानगी पे 
अक्सर !
गोया हमने वस्त सहरा कोई गुलिस्तां 
सजा लिया, ख़ानाबदोश थे इक 
मुद्दत से मेरे जज़्बात, जो 
तुम्हें देखा भूल गए 
सभी रस्ते, 
छोड़ 
दिया ताक़ीब ए क़ाफ़िला, आख़िर में 
हमने, तुम्हारी आँखों में कहीं 
इक घर बना लिया, हमने 
तो ज़िन्दगी यूँ ही 
दाँव पे लगा 
दिया - 

* * 
- शांतनु सान्याल 


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art by derek m