Thursday, 26 December 2013

किसी ने छुआ था दिल मेरा - -

इक तूफ़ान सा उठा कांपते साहिल में 
कहीं, या किसी ने छुआ था दिल 
मेरा क़ातिल निगाह से, 
मंज़िल थी मेरे 
सामने 
और मैं भटकता रहा तमाम रात, न 
जाने किस ने पुकारा था, मुझे 
तिश्नगी भरी चाह से, 
उस मुश्ताक़ 
नज़र 
का असर था, या मैंने ली अपने आप 
ही अहद ए दहन, न जाने क्यूँ 
इक धुआं सा उठता रहा 
लौटती हुई बहारों 
के राह से, 
थकन 
भरी उन लम्हात में भी ऐ ज़िन्दगी -
देखा तुम्हें, यूँ ही मुस्कुराते,
सब कुछ लुटा कर
लापरवाह से, 
किसी ने 
छुआ था दिल मेरा क़ातिल निगाह से,

* * 
- शांतनु सान्याल  
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
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