Sunday, 22 December 2013

शाप मुक्त - -

वो अहसास जिसमें तू है शामिल 
किसी चिरस्थायी ख़ुश्बू की 
तरह, वो दग्ध भावना 
जिसे तू कर जाए 
सजल एक 
बूँद -
ओस की तरह, वो अनुभूति काश 
पा जाए जीवन, जिसमें हों 
तेरी आँखों से झरती 
आलोक सुधा 
की -
शीतलता, वो अंतर्मन की गहराई 
जिसमें हों तेरे प्रणय की 
अथाह गहनता, हो 
जाएँ जिसके 
स्पर्श 
से शाप मुक्त, जीवन की समस्त 
अज्ञानता - - 

* * 
- शांतनु सान्याल  
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
the beauty of magnolia