Sunday, 1 December 2013

न बुझाओ चश्म शमा - -

न बुझाओ चश्म शमा इतनी जल्दी, 
सितारों की महफ़िल में है कुछ 
विरानगी अब तलक, न 
गिराओ राज़ ए 
पर्दा इस 
तरह वक़्त से पहले कि गुलों में हो 
वहशत बेवजह, अभी तो इक 
तवील ख़ुश्बुओं का सफ़र 
है बाक़ी, हमने कहाँ 
सिखा है अभी 
तक इक 
मुश्त मुस्कुराना, रहने दो यूँ ही बूंद 
बूंद इश्क़ नूर का टपकना, कि 
तपते ज़िन्दगी को कुछ 
तो संदली अहसास 
हो, खुले रहें 
कुछ देर 
और तुम्हारे निगाहों के दरीचे कि -
ज़िन्दगी महकना चाहती है 
आख़री पहर तक यूँ 
ही मद्धम मद्धम,
लम्हा लम्हा,
दम ब 
दम सुबह होने तलक, न बुझाओ 
चश्म शमा इतनी जल्दी, 
सितारों की महफ़िल 
में है कुछ विरानगी अब तलक - - 

* * 
- शांतनु सान्याल 
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
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