Wednesday, 23 October 2013

अहसास पहले - -

न दिखाओ मुझे गुल ए ख़्वाब कोई, 
जिसके मुरझाने का इमकां रहे 
तारी रात भर, इतना भी 
अपनापन ठीक 
नहीं कि 
आँख खुलते बिखर जाए आसमां -
की जामियत, क़तरा क़तरा 
नज़र आए मासूम 
वजूद मेरा,
और तुम मुस्कुराओ उफ़क़ पार यूँ 
गोया हो चला हो वक़्त से पहले
रंग तलुअ फ़ज़र कोई !
कुछ तो वक़्त 
दो मुझे,
कि तुम्हें अहसास करने से पहले - -
साँसों को संभलना आ जाए !
* * 
- शांतनु सान्याल  


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