Sunday, 29 September 2013

दिल से हमने भुला दिया - -

ज़रा सी धूप की ख़्वाहिश थी मेरी, उसने -
तो वजूद ही झुलसा दिया, न जाने 
उसकी नज़र में मुहोब्बत के 
मानी क्या थे, जिस्म 
तो है नापायदार 
इक महल,
उसने 
तो रूह तक हिला दिया, अब कोई न पूछे 
अफ़साना ए ज़िन्दगी मेरी, हमने 
अपने ही हाथों, वो तमाम 
उभरते ख़्वाबों को 
जला दिया,
न देख 
फिर मुझे हसरत भरी नज़र से यूँ, जा -
तुझे दिल से हमने भुला दिया - - 
* * 
- शांतनु सान्याल 


http://sanyalsduniya2.blogspot.in/
painting by artist Marina Petro 2