Sunday, 15 September 2013

अंदरूनी कोहरा - -

हासिल चाहे जो भी हो ज़िन्दगी में कुछ 
भी फ़िक़्र नहीं, ये कम तो नहीं कि 
मुस्कुराना तो हमें आ ही 
गया, जब कभी 
दर्द बढ़ा 
दिल में हमने इंतज़ार किया बारिश का,
इक शिद्दत से थी आँखों को 
शिकायत हमसे, चलो 
अच्छा ही हुआ 
आंसू छुपाना 
तो हमें  
आ ही गया, मेरी पलकों में तुम न ढूँढ - 
पाओगे एक भी अश्क क़तरा,
ये राज़ ए बरसात है 
दिल के दाग़ 
बहाना 
तो हमें आ ही गया, ये और बात है, कि 
भीगे जिस्म के अन्दर है सुलगता 
आतीशफ़िशां कोई, फिर भी 
अंदरूनी कोहरा दबाना 
तो हमें आ ही 
गया - - 
* * 
- शांतनु सान्याल 
http://sanyalsduniya2.blogspot.in/
chinese painting traditional 1