Wednesday, 17 July 2013

आख़िर इल्ज़ाम किसे दें - -

दग़ा दे जाए जब अपना ही साया, आख़िर 
इल्ज़ाम किसे दें, किनाराकशी थी 
उसकी बहोत ही ख़ूबसूरत,
टूटती रहीं दिल की 
धडकनें रह 
रह कर,
उसने कहा हमने तो दिल तेरा छुआ भी - 
नहीं, इस अदा पे कोई क्या करे,
वो मुस्कुराते हैं या चलते 
हैं तीर मकनून !
हम ख़ुद 
हैं मातबर इस दिलकश फ़रेब के, सोचते 
हैं अब कि, इनाम किसे दें ! 
* * 
- शांतनु सान्याल 

http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
art by EmilyMiller