Saturday, 13 April 2013

शमादान आतफ़ी - -

दर ओ दीवार के रंग से न आज़मा, दिल 
की ज़मीं की ख़ूबसूरती, ढह जाए 
मेहराब तो क्या, चांदनी हर 
चंद तलाशती है छूना 
अहसास ए संग -
मरमरी !
फ़रामोश करके मेरी इश्क़ बुनियाद, वो 
रहा बहोत परेशां, ताउम्र कोई देता 
रहा दस्तक, ताउम्र दहलीज़ 
पे थी महकती इक 
ख़ामोशी, हर 
लम्हा 
वो सजाए गुलदान क़ीमती, हर पल - - 
कहीं फिसल जाए हाथों से, 
शमादान आतफ़ी !
* * 
- शांतनु सान्याल 
आतफ़ी - जज़्बाती 


http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
palermo - art by john lovett