Sunday, 17 March 2013

तोहफ़ा ए दर्द - -

मेरा दर्द मुझको अज़ीज़ था क्यूँ तुमने 
ख़ुद को शामिल किया, फिर बुझे 
अंगारों को हवा दी, फिर 
इक बार ज़िन्दगी 
को बा सिम्त 
गिरफ़्त ए 
तूफां 
किया, मेरा ज़ब्त इतना ज़हीफ़ न था, 
क्यूँ तुमने फिर शीशा ए शक्ल 
दिया, मैं यूँ ही था अपनी 
दुनिया में खोया 
हुआ, क्यूँ 
तुमने 
मुझसे प्यार किया, क्यूँ तुमने फिर - - 
इक नया तोहफ़ा ए दर्द दिया।
* * 
- शांतनु सान्याल 
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
painting by AMANDA ELLIS 
painting by AMANDA ELLIS