Friday, 18 January 2013

बर्ग ए जदीद - -


महवर ए फ़सील पर न रख ज़िन्दगी मेरी,
कहीं जल के फिर दोबारा अक्स ए 
आतिशफिशां  न बन जाऊं, 
ये तेरी आज़माइश न 
कर दे मुझे इक 
शोला 
ए जुनूं, पिघलूं कुछ इस तरह कि सारी - 
दुनिया में बरपे हंगामा, रहने दे 
मुझे नर्म ज़मीं के निचे,
नूर ए सहर की 
चाहत लिए,
कि तेरी मुहोब्बत में इक दिन वजूद हो 
जाए बर्ग ए जदीद - - 
* * 
- शांतनु सान्याल
अर्थ - 
महवर ए फ़सील - आग की दीवारों के बीच 
बर्ग ए जदीद - नया पत्ता 
नूर ए सहर - सुबह की किरण
आतिशफिशां - ज्वालामुखी 
शोला ए जुनूं - आवेगी शिखा 

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Artist-Gervie G. Macahia