Thursday, 13 December 2012

अन्दाज़ ए महलक - -

न देख फिर मुझे फिर वही 
अन्दाज़ ए महलक 
नज़र से,
अभी 
अभी उभरा हूँ मैं तबाहकुन 
तूफां के असर से,
दूर तलक हैं 
बिखरे 
दर्द ओ ग़म के क़तरे, फिर 
भी हैं तेरी आंखे न 
जाने क्यूँ इस 
क़दर 
बेख़बर से, ज़रा कुछ देर तो 
सही, सजने दे मजलिस 
ए  सितारा, जिस्म 
ओ जां अभी 
तक हैं 
कुछ तर बतर से - - - - - - 
* * 
- शांतनु सान्याल  
अन्दाज़ ए महलक - घातक अन्दाज़ 
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/


cloudy night - art by ab