Thursday, 30 August 2012


किसे ख़बर 

वो लचक कहाँ बाक़ी गुल झरने के बाद, 
तर्जुमा ए जज़्बात चाहे जो भी हो -
इक ख़ुमार सा तारी रहा देर 
तक, हालाकि दिल था 
ग़मगीन उससे 
बिछड़ने के 
बाद, 
अब किसे ख़बर, कौन होगा मुताशिर -
ख़ुश्बू ए मुहोब्बत बिखरने के 
बाद, उसकी हर सांस में 
जैसे उठती रहीं रह 
रह कर कोई 
ख़ुफ़िया 
तरन्नुम, अब ज़मीं ओ आसमां सब 
लगे एक से, किसे मालूम क्या 
है ख़लाओं में, जिस्म से 
रूह निकलने के 
बाद - - - 

- शांतनु सान्याल
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/