Sunday, 15 July 2012


महासत्ता 

शून्यता के अतिरिक्त कुछ भी नहीं वहां -
फिर भी जीवन से लम्बी है ये मरीचिका,

अज्ञात स्रोत से निर्गत वो अरण्य गंध या 
नभ झरित, उद्भासित आलोक नीहारिका ,

दिग्भ्रमित मृग वृन्द सम, हिय भावना -
वन वन भटके ज्यों अधीर अभिसारिका,

अनहद शीर्ष पर आसीन, वो महासत्ता -
उँगलियों में नचाये जैसे अदृश्य नायिका,

- शांतनु सान्याल 


Bouganvilia by artist  Rachel Walker