Monday, 23 April 2012

पतझर से हो कर गुज़रे हैं ये ख़्वाब तमाम रात 
तभी उभरते तूफ़ानी हवाओं से नहीं डरते,
हर क़दम इक तलातुम, हर मोड़ पे दुस्वारियां 
ताबीरे हयात, जूनूनी बहावों से नहीं डरते,
- शांतनु सान्याल 
midnight - midnight - Tania Farrugia 
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/