Saturday, 7 August 2010

रुधिरांजलि

रुधिरांजलि


रक्त झरित वक्षस्थल, आहत मम देह-प्राण -

दग्ध हस्तों से हे माँ !रुधिरांजलि स्वीकार करें/

गूंजे जय घोष , शंख नाद हो अष्ठ दिगन्तों में

भरतवंशी-सनातनी,शत्रुओंकापुनः प्रतिकार करें/

ऐ धर्म युद्ध नहीं ,है अस्तित्व- समर आव्हान,

हे सुप्त आत्माएं, सहस्त्र बाहू से संहार करें/

विक्षिप्त मातृत्व की चीख है,सुवीर्य का प्रमाण दें,

कंठकहीन हो धरा, सिंह सम निहत बारम्बार करें/

स्वजाति,स्वभाषी,अरण्यवासी, चाहे प्रतिरोध बने

सपथ माँ लज्जा की, भुजंगो पे वार हर बार करें/

खंडित देवालय, रक्त प्लावित प्राचीर पुकारते--

उठो अर्जुन, अभिमनुयों, भग्न स्वप्न साकार करें//

---- शांतनु सान्याल