Monday, 16 August 2010

सुदूर सीमान्त

कर ध्वनि,जय घोष, ध्वजारोहण,पुष्पवर्षा दिवसांत



पुनःतिमिर घन रात्रि,दूर बिहान , तन-मन अशांत /



नग्न शिशु, क्षुधित उदर, माँ की ममता भयाक्रांत



क्रन्दित ह्रदय, रिक्त पात्र, असंख्य मुख पुनः क्लांत /



निर्वस्त्र दर्शन,विछिन्न स्वप्न, मिथ्या सर्व सिद्धांत



लाल किला, विहंगम प्रवचन,ख़ाली हाथ तदुपरांत /



मेघाच्छादित नभ, भ्रमित भविष्य सुदूर सीमान्त //



---- शांतनु सान्याल